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शनिवार, 21 जुलाई 2012

यारां नाळ बहारां

ज़िन्दगी के देखे दो ही रास्ते
एक बागों की बहार
दूसरा उजाड़ की कगार का.
बचपन से अब तक हर किस्से की गवाह दोस्ती
हर मोड़ पर हमको मिली बेपनाह दोस्ती
आंसू से हँसी तक सदा साथ साथ है
ऐसी है हर दोस्त की हमराह दोस्ती

अकेले से हो जाते थे हम तब दोस्तों
होती थी हमसे जों ये खफा दोस्ती

अब दिन बदले, घड़ियाँ बदलीं,
साजन आए, सावन आया ।

धरती की जलती साँसों ने

मेरी साँसों में ताप भरा,
सरसी की छाती दरकी तो
कर घाव गई मुझपर गहरा,

लिखने को कुछ लब्ज़ सोचते हैं
लकिन सोच में ही खुद के गूम हो जाते हैं
भीड़ इतनी हैं राहों में ,
की चलते चलते फिर भूल जाते हैं 
की सोचा था किसी को कुछ लिखें !!
चलते  चलते  यूँही  राहों  में 
धुंदली धुंदली यादों के साये में ,
पास सम्हाले रखे कुछ अफसाने कुछ फ़साने 
बस अब दिल इन्हिसे भर आता है,
लिखने तक फिर सोच सोच कर ही
 मन थक जाता है !!!!
तुम से ही तो हर दर्द हर राज़ बांटा है
तू ही तो रही हमारी मैकदा दोस्ती

खूबसूरत तुझसे ज़िन्दगी का हर पड़ाव है
बहुत महफूज़ है तेरी पनाह दोस्ती

तू रही है रहनुमा ज़िन्दगी की हर राह पर
तेरे रहते न होंगे कभी गुमराह दोस्ती

तू साथ है तो हर तूफ़ान पार कर लेंगे
फ़िर कश्ती की भी न है परवाह दोस्ती